गुरु बिना जग विरथा /शत्रुहन पटेल/ गुरु महिमा जस गीत लिरिक्स | CG Jas Lyrics
गुरु बिना जग विरथा – गुरु महिमा जस गीत
═══════❁═══════
गीत -गुरु बिना जग बिरथा
गायक -शत्रुहन पटेल
जस मंडली -नव जागृति जस परिवार देवसरा (बालोद)
यूट्यूब -CG MUSIC INDIA
वेबसाइट -CGJASLYRICS
वेबसाइट ऑनर -के के पंचारे
═══════❁═══════
"गुरु म देवी गुरु म देवता ,गुरु म चारो धाम हे
सागर ले पार लगइया, तन अंतस सियाराम हे
मुखड़ा
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु महिमा के कहनी अगम हे चरण मनाहु
उड़ान -चरण मनाहु हो दाई ,चरण मनाहु वो ,चरण मनाहु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु महिमा के कहनी अगम हे चरण मनाहु
अंतरा -1
गुरु हे ब्रम्हा गुरु हे विष्णु गुरु हे देवो महेश्वरा
गुरु हे देवो महेश्वरा
गुरु के कहनी 16 आना पार लगाही भव सगरा
पार लगाही भव सगरा
उड़ान -गुरु डोंगा खेवईया बने हे दाई दयालु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु महिमा के कहनी अगम हे चरण मनाहु
अंतरा -2
एकलव्य ला हाक पारके द्रोणा हवय बलाये गा
द्रोणा हवय बलाये
गुरु चरण म एकलव्य हां अंगठा हवय चढ़ाये गा
अंगठा हवय चढ़ाये
उड़ान -नवजागृति शत्रुहन आहे दाई दयालु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु महिमा के कहनी अगम हे चरण मनाहु
अंतरा -3
कुम्हार लोरी के दाई दयालु जस म नाम कमाये हे
जस म नाम कमाये हे
नंद कुमार नंदगहिया संग म गुरु परसाद ला पाये हे
गुरु परसाद ला पाये हे
उड़ान -जेकर लेखा जग में अलख जगाये दाई दयालु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु बिना ये जग विरथा हे चेत लगाहु
गुरु महिमा के कहनी अगम हे चरण मनाहु
═══════🪔═══════
गीत के अर्थ
इस गीत का मूल भाव गुरु की महिमा और गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा है। गीतकार कहता है कि गुरु के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा और दिशाहीन हो सकता है। गुरु अपने ज्ञान, उपदेश और आशीर्वाद से मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य और भक्ति की राह दिखाते हैं।
“गुरु म देवी गुरु म देवता, गुरु म चारो धाम” का भाव है कि भक्त के लिए गुरु का स्थान अत्यंत ऊँचा है। गुरु में ही देवी-देवताओं और तीर्थों का दर्शन करने जैसी श्रद्धा रखी गई है।
“सागर ले पार लगइया” में गुरु को जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने वाला खेवइया बताया गया है। अर्थात गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शन मनुष्य को मोह-माया तथा अज्ञान से ऊपर उठने में सहायता करता है।
गीत में गुरु के चरणों में श्रद्धा रखने और गुरु की महिमा का स्मरण करने का संदेश दिया गया है।
गीत की विशेषताएँ
- यह छत्तीसगढ़ी भाषा में गुरु महिमा पर आधारित भक्तिमय जस गीत है।
- गीत में गुरु को देवी, देवता और चारों धाम के समान महान बताया गया है।
- गुरु को भवसागर से पार लगाने वाला खेवइया कहा गया है।
- गुरु के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का सुंदर वर्णन है।
- गीत में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का धार्मिक संदर्भ मिलता है।
- एकलव्य और द्रोणाचार्य का प्रसंग गुरु-भक्ति को दर्शाता है।
- गुरु के चरणों में शीश नवाने का भाव पूरे गीत में दिखाई देता है।
- गुरु पूर्णिमा और गुरु पूजा के अवसर पर यह गीत विशेष रूप से उपयोगी है।
- जस शैली के कारण इसे धार्मिक एवं भक्ति कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- गीत का मुख्य संदेश है कि गुरु के ज्ञान और कृपा से जीवन को सही दिशा मिलती है।
गुरु महिमा की कथा
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में गुरु का स्थान बहुत ऊँचा माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह अपने शिष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब उसे सही और गलत के बीच निर्णय लेने में कठिनाई होती है। ऐसे समय में गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शन उसे सही दिशा दिखाने का काम करता है।
गुरु महिमा पर आधारित इस छत्तीसगढ़ी जस गीत में इसी भावना को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। गीत की शुरुआत गुरु को देवी, देवता और चारों धाम के समान महान बताने से होती है। भक्त के लिए गुरु का स्थान इतना पवित्र है कि वह गुरु के चरणों में ही अपना विश्वास और श्रद्धा रखता है।
गीत में गुरु को भवसागर से पार लगाने वाला खेवइया कहा गया है। भवसागर का अर्थ केवल मृत्यु और जन्म का संसार नहीं, बल्कि जीवन की कठिनाइयों, मोह, अज्ञान और भ्रम से भी है। जिस प्रकार नाविक नाव को नदी या समुद्र के पार ले जाता है, उसी प्रकार गुरु अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से शिष्य को जीवन की कठिन राह पार करने में सहायता करता है।
गीत में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप के रूप में स्मरण किया गया है। इसका भाव यह है कि गुरु सृजन, पालन और परिवर्तन के ज्ञान का मार्ग दिखाने वाला होता है। गुरु का उपदेश शिष्य के भीतर ज्ञान की ज्योति जलाकर उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
गीत में एकलव्य और द्रोणाचार्य का प्रसंग भी आता है। यह प्रसंग गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना को सामने रखता है। एकलव्य ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना और गुरु को अपना आदर्श स्वीकार किया।
गुरु की महिमा केवल शब्दों में कह देने से समाप्त नहीं होती। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा उनके बताए हुए अच्छे मार्ग पर चलने में है। गुरु हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता, सेवा, सत्य और सदाचार का रास्ता अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
इसीलिए इस जस गीत का संदेश है कि मनुष्य को अपने जीवन में गुरु के ज्ञान का सम्मान करना चाहिए। गुरु के चरणों में प्रेम और श्रद्धा रखकर उनके अच्छे विचारों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
माता शेरावाली के मनमोहक जस गीत
१.तीनो जुग म तैहा आये ओ – छत्तीसगढ़ी जस गीत
3.भवानी तोरे आरती – आरती जस गीत
4.अंगार मोती -गुड्डा साहू जस गीत
6. घनघोर मचाये रन में कंकालिन हां – जस गीत
8. डोंगरगढ़ जाबो बमलेश्वरी दरबार में – जस गीत
9. महराज कुमार मास्टर सुनील सिहोरे
10.तोर पाँव के घुँघरू - पचरा जस गीत
वेबसाइट – CG Jas Lyrics
CG Jas Lyrics पर आपको छत्तीसगढ़ी जस गीत, भक्ति गीत, माता के जस, पचरा, आरती, नवरात्रि गीत और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों के लिरिक्स पढ़ने को मिलते हैं। हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ी लोक एवं भक्ति गीतों को डिजिटल माध्यम से पाठकों तक पहुँचाना है।




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें